नीतीश मंत्रिमंडल के 64% मंत्री दागी, 50% के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले, शिक्षा मंत्री को दिखाया गया था बाहर का रास्ता

बिहार सरकार में दागी मंत्रियों का मामला अभी शांत होता नहीं दिख रहा है। विधानसभा के बजट सत्र में विपक्षी नेता सत्तारूढ़ दल को इस मामले पर लगातार घेर रहे हैं। पिछले हफ्ते वामदल के विधायकों ने नीतीश कुमार के कैबिनेट में शामिल कई मंत्रियों को दागी बताया और इसको लेकर विधानसभा परिसर में प्रदर्शन भी किया। वाम दल के विधायकों ने दागी मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग भी की। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और इलेक्‍शन वॉच ने नीतीश कुमार कैबिनेट के 31 सदस्‍यों में से 28 के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है। एक मंत्री राम सूरत कुमार का शपथ पत्र स्पष्ट नहीं था और अशोक चौधरी व जनक राम के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इस वजह से सभी आंकड़े 28 सदस्यों के शपथ पत्र पर आधारित हैं। इनमें से 18 यानी 64.28 प्रतिशत मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें भी 14 (50%) के खिलाफ दर्ज मामले गंभीर आपराधिक किस्‍म के हैं। रिपोर्ट के अनुसार कैबिनेट में BJP के 14 मंत्रियों में 8 यानी 57% और JDU के 11 में से तीन यानी 27% पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। गंभीर आपराधिक मामलों वाले तीन अन्‍य मंत्रियों में हम, विकासशील इंसान पार्टी और एक निर्दलीय भी शामिल हैं।

50.6% विधायकों के खिलाफ गंभीर मामले

ADR की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 के विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियों के 243 नेताओं में से 163 यानी 67% ने खुद पर आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। वहीं, 2015 विधानसभा चुनाव में 142 यानी 58% ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। इस बार जीत हासिल करने वाले 123 यानी 50.6 फीसदी विधायकों के खिलाफ गंभीर किस्‍म के आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 19 के खिलाफ हत्‍या, 31 के खिलाफ हत्‍या के प्रयास, 8 के खिलाफ महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले दर्ज हैं।

मेवालाल चौधरी को हटाया था

चुनाव के तुरंत बाद नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल गठन के बाद उनके एक मंत्री मेवालाल चौधरी पर भ्रष्‍टाचार के मामले ने जब तूल पकड़ा तो उन्हें हटाना पड़ा था। मेवालाल पर यह मामला उनके बिहार कृषि विश्‍वविद्यालय, सबौर के कुलपति रहते 161 असिस्‍टेंट प्रोफेसरों और जूनियर साइंटिस्‍ट की नियुक्ति से जुड़ा है। इस मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद JDU ने उन्‍हें निलंबित कर दिया था। मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्रालय का दायित्‍व दिया गया था। आइए जानते हैं कि नीतीश सरकार के किन मंत्रियों पर कौन-कौन से मामले दर्ज हैं।

मदन सहनी, मंत्री, समाज कल्याण विभाग

दरभंगा जिले के बहादुरपुर सीट से JDU के विधायक हैं। IPC के सेक्शन 188 के तहत इनके ऊपर दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। एक मामला बहादुरपुर और दूसरा घनश्यामपुर थाना में दर्ज है। साल 2009 में बहादुरपुर थाना में दर्ज हुए FIR नंबर 218 में 7 जुलाई 2020 को चार्ज फ्रेम हो चुका है। यह केस दरभंगा के ACJM-9 के कोर्ट में है।

प्रमोद कुमार, मंत्री, गन्ना उद्योग विकास विभाग

पूर्वी चंपारण जिले की मोतिहारी सीट से जीतने वाले भाजपा के विधायक हैं। मगर, चौंकाने वाली बात यह है कि नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बन रहे प्रमोद कुमार के ऊपर IPC की धारा 379 यानी चोरी की FIR दर्ज है। इनके ऊपर कुल 4 आपराधिक मामले दर्ज हैं। IPC की धारा 153A के तहत दो गुटों के बीच धर्म, जाति, जन्मस्थान और भाषा के नाम पर लोगों को भड़काने व उन्हें आपस में लड़वाने का मामला भी दर्ज है। प्रमोद कुमार पर तीन FIR मोतिहारी थाना और एक FIR पिपरा कोठी थाना में दर्ज है। मोतिहारी के तीनों केस में चार्ज फ्रेम हो चुका है।

लेसी सिंह, मंत्री, खाद्य उपभोक्ता विभाग

पूर्णिया की धमदाहा सीट से जदयू की विधायक हैं। बारहवीं पास लेसी सिंह 2.53 करोड़ से अधिक की संपत्ति की मालकिन हैं। इनके ऊपर किसी प्रकार का आपराधिक मुकदमा नहीं है। हालांकि एक पूर्व IPS अधिकारी ने यह आरोप लगाया था कि इनके घर से अवैध हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था।

नीरज कुमार सिंह उर्फ नीरज बब्लू, मंत्री, वन, पर्यावरण संरक्षण विभाग

दिवंगत बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई हैं और सुपौल जिले के छातापुर से भाजपा के विधायक हैं। अलग-अलग आपराधिक मामलों के तहत इनके ऊपर कुल तीन केस दर्ज हैं। एक केस आलमनगर थाना में, जबकि दो केस वीरपुर थाना में दर्ज है। तीनों ही केस में इनके ऊपर चार्ज फ्रेम हो चुका है। सबसे गंभीर आरोप IPC की धारा 414 के तहत दर्ज केस है। आलमनगर थाना में दर्ज इस केस में चोरी की संपत्ति को छिपाने का आरोप लगा है।

सुभाष सिंह, मंत्री, सहकारिता विभाग

गोपालगंज सीट से भाजपा के विधायक हैं। इनके ऊपर कुल 6 आपराधिक मामले हैं। इनमें 5 FIR गोपालगंज और छठा थावे के मांझागढ़ थाने में दर्ज है। इनके ऊपर अटेम्प्ट टू मर्डर के लिए IPC की धारा 307 और जान से मारने की धमकी देने के लिए IPC की धारा 506 के तहत मुकदमा दर्ज है। दो केस में इनके ऊपर कोर्ट में चार्ज फ्रेम हो चुका है।

सुमित कुमार सिंह, मंत्री, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग

पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित कुमार सिंह जमुई जिले की चकाई सीट से निर्दलीय विधायक हैं, लेकिन इन्होंने अपना समर्थन नीतीश कुमार को दिया है। इस कारण से मंत्री बनाए गए हैं। इनके ऊपर मुंगेर के कोतवाली थाना में ट्रस्ट के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी करने के मामले में IPC की धारा 406, 420, 467, 468, 471, 170, 120बी और 34 के तहत दर्ज है। हालांकि इस केस में अब तक कोर्ट में चार्ज फ्रेम नहीं हुआ है।

आलोक रंजन, मंत्री, कला संस्कृति विभाग

सहरसा से भाजपा के विधायक हैं। IPC की धारा 506 सहित दूसरी गंभीर धाराओं में इनके ऊपर एक आपराधिक मामला सहरसा के सदर थाना में दर्ज है। इस केस में अभी चार्ज फ्रेम नहीं हुआ है।

मो. जमा खान, मंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग

कैमूर जिले की चैनपुर सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इन्होंने चुनाव जीता था। विधायक बनने के बाद यह नीतीश कुमार के पक्ष में आ गए। इनके ऊपर तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, इनमें दो केस भभुआ और एक चैनपुर थाना में दर्ज है। ये केस IPC की 324 और 307 सहित अन्य गंभीर धाराओं में है। हालांकि अब तक किसी भी केस में चार्ज फ्रेम नहीं हुआ है।

मुकेश सहनी, मंत्री, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग

पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री मुकेश सहनी ने पांच आपराधिक और गंभीर प्रकृति के तीन मामलों की घोषणा की है।

जीवेश कुमार, मंत्री, श्रम संसाधन विभाग

भाजपा के जीवेश कुमार पर भी पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें गंभीर प्रकृति के चार मामले हैं।

शाहनवाज हुसैन, मंत्री, उद्योग विभाग

पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे शाहनवाज हुसैन अब बिहार सरकार में उद्योग मंत्री है। शाहनवाज हुसैन के ऊपर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले दर्ज हैं। लेकिन, एक महिला ने इनके ऊपर यौन शोषण का आरोप लगाया है, जिसका मामला कहीं दर्ज नहीं है।

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