सीमा पर तैनात सैनिकों को मिली नई हाउसिंग फेसिलिटी, माइनस 40 डिग्री तापमान में भी रह सकेंगे जवान

चीन के साथ जारी तनाव के बीच भारतीय सेना ने लद्दाख में तैनात रहने वाले सैनिकों के लिए आधुनिक आवास तैयार किए हैं। इनके बन जाने से सर्दियों के मौसम में भारतीय सेना की ऑपरेशनल एफिशियेंसी में इजाफा होगा।

सेना के लिए तैयार की गई हाउसिंग फेसिलिटी में बिजली, पानी और हीटिंग के बेहतर इंतजाम हैं।
सेना के लिए तैयार की गई हाउसिंग फेसिलिटी में बिजली, पानी और हीटिंग के बेहतर इंतजाम हैं।

सेना ने कहा- नए हाउस बेहतर सुविधाओं से लैस हैं। बिलकुल नई तकनीक से इन्हें तैयार किया गया है। इनमें बिजली, पानी, हीटिंग की सुविधा के साथ स्वास्थ्य और सफाई का भी ध्यान रखा गया है। आर्मी के पास अब तक सर्दियों में तैनाती के लिए स्मार्ट कैंप्स ही मौजूद थे। नए आवास उनकी कमी भी पूरी करेंगे।

नई हाउसिंग फेसिलिटी में ज्यादा जवानों के रहने की जगह बनाई गई है। जरूरत न होने पर बेड को फोल्ड भी किया जा सकता है।
नई हाउसिंग फेसिलिटी में ज्यादा जवानों के रहने की जगह बनाई गई है। जरूरत न होने पर बेड को फोल्ड भी किया जा सकता है।

हीटेड टेंट में रहते हैं फ्रंटलाइन पर तैनात सैनिक

सेना ने कहा- फ्रंटलाइन पर तैनात सैनिकों को हीटेड टेंट में रखा जाता है। उनकी तैनाती रणनीति के मुताबिक अलग-अलग जगह पर की जाती है। इसलिए, इमरजेंसी में उनकी मदद के लिए जरूरी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान भी की गई है।

लद्दाख में बनी अपग्रेडेड लिविंग फेसिलिटी में रहने के साथ ही ऑफिस और ट्रेनिंग का इंतजाम भी है।
लद्दाख में बनी अपग्रेडेड लिविंग फेसिलिटी में रहने के साथ ही ऑफिस और ट्रेनिंग का इंतजाम भी है।

सर्दियों में माइनस 40 डिग्री तक रहता है तापमान

सर्दियों में लद्दाख का तापमान 30 से 40 डिग्री तक गिर जाता है। नवंबर महीने के बाद यहां 40 फीट तक बर्फ गिरती है। इस दौरान पूरे इलाके का सड़क संपर्क भी कट जाता है। ऐसे हालात में सर्दियों में सीमा पर तैनात सैनिकों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनी रहना जरूरी है। इस सैक्टर में तैनात होने वाले सभी सैनिकों को नए आवासों में ही रखा जाएगा।

भारत-चीन के बीच 7 महीने से तनाव बना हुआ है

पूर्वी लद्दाख में मई के महीने से ही भारत और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। अब डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया को वेरिफाई करने के लिए भारतीय और चीनी मिलिट्री जॉइंट मैकेनिज्म में भाग लेगी, जिसके लिए प्रतिनिधियों की बैठक के साथ-साथ मानवरहित विमानों (UAV) का उपयोग किया जाएगा। हालांकि, पिछले अनुभवों को देखते हुए भारत इस बार चीन पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहता है।

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