इन दिन मनाई जाएगी हरतालिका तीज, जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम

सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज व्रत एक प्रमुख व्रत है। बाबा गरीब नाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक जी व आध्यात्मिक गुरु धर्म संसद मुजफ्फरपुर के संयोजक पंडित कमलापति त्रिपाठी प्रमोद जी ने कहा कि यह पावन पर्व भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया 21 अगस्त को मनाई जायेगी । भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है। हरतालिका तीज व्रत कुमारी और सौभाग्यवती स्त्रियां करती हैं। हरतालिका तीज व्रत निराहार और निर्जला किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। हरतालिका तीज व्रत करने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
हरतालिका तीज के दिन भी गौरी-शंकर की पूजा की जाती है। हरतालिका तीज का व्रत बेहद कठिन है। इस दिन महिलाएं 24 घंटे से भी अधिक समय तक निर्जला व्रत करती हैं। यही नहीं रात के समय महिलाएं जागरण करती हैं और अगले दिन सुबह विधिवत्त पूजा-पाठ करने के बाद ही व्रत समापन होता हैं। मान्यता है कि हरतालिका तीज का व्रत करने से सुहागिन महिला के पति की उम्र लंबी होती है जबकि कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है। यह पर्व भारत और नेपाल के तकरीबन सभी जगहों पर होता है। हरतालिका दो शब्दों से मिलकर बना है- हरत और आलिका. हरत का मतलब है ‘अपहरण’ और आलिका यानी ‘सहेली’. प्राचीन मान्यता के अनुसार मां पार्वती की सहेली उन्हें घने जंगल में ले जाकर छिपा देती हैं ताकि उनके पिता भगवान विष्णु से उनका विवाह न करा पाएं। सुहागिन महिलाओं की हरतालिका तीज में गहरी आस्था है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुहागिन स्त्रियों को शिव-पार्वती अखंड सौभाग्य का वरदान देते हैं। वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है . इस वर्ष तीज 21 अगस्त को है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, उस दिन सुबह 5 बजकर 53 मिनट से सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक यानी 2 घंटे 36 मिनट का अच्छा मुहूर्त है। शाम को 6 बजकर 54 मिनट से रात 9 बजकर 6 मिनट तक पूजा की जा सकती है।

रिपोर्ट : ऋतुराज कुमार

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